टोल कलेक्शन में गड़बड़ी के आरोपों के चलते भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने उत्तर प्रदेश सहित देशभर में टोल संचालन करने वाली 14 एजेंसियों पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया है। इतना ही नहीं, इन कंपनियों द्वारा जमा की गई 100 करोड़ रुपये से अधिक की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी भी जब्त कर ली गई है।
मामला कैसे खुला?
जनवरी में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने छापा मारा था। इस दौरान टोल कलेक्शन में गड़बड़ी के सबूत मिले, जिसके बाद यह कार्रवाई शुरू हुई।
NHAI ने क्यों लगाया बैन?
STF की जांच और एफआईआर के आधार पर, NHAI ने इन कंपनियों को 'कारण बताओ नोटिस' भेजा था। लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर, टोल संचालन के टेंडर एग्रीमेंट के उल्लंघन के कारण दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया।
अभी टोल प्लाजा कौन चलाएगा?
NHAI ने स्पष्ट किया है कि नई कंपनियों की नियुक्ति तक यही एजेंसियां टोल संचालन करती रहेंगी, ताकि टोल कलेक्शन प्रभावित न हो।
यह कदम टोल घोटालों पर लगाम लगाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
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